Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi | Hindi Love Ghazal

 Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi

तहज़ीब हाफ़ी,  5 दिसंबर, 1989 को पाकिस्तान में पैदा हुए थे हाफ़ी साहब ने मेहरान विश्वविद्यालय से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग करने के बाद बहावलपुर विश्वविद्यालय से उर्दू में एमए किया, हाफी साहब पाकिस्तान और भारत दोनों जगह बहुत पसंद किये जाते हैं क्योंकि वे एक अलग शैली तथा सुंदर लहजे वाले कवि/शायर हैं, इसी लिए हमने भी आज Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi उनकी कुछ बेहतरीन शायरी का कलेक्शन बनाया है जो आपको भी पसंद आनी चाहिए। 

Tehzeeb Hafi, was born on 5 December 1989 in Pakistan, Hafi Sahab did his MA in Urdu from Bahawalpur University after doing software engineering from Mehran University, Hafi Saheb is very much liked both in Pakistan and India because he has a different style and He is a poet / poet with beautiful accent, that's why we have also made a collection Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi of some of his best poetry today, which you should also like.

Tehzeeb Hafi Shayari Collection


बिछड़ कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा,
वो थक्क जायेगा और मेरे गले से आ लगेगा..!

मै मुस्किल में तुम्हारे काम आऊँ या न आऊं,
मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हे अच्छा लगेगा..!

मै जिस कोसिस से उसको भूल जाने में लगा हूँ,
ज्यादा भी गर लग गया तो हफ्ता लगेगा..! 

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Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi

Bichhad kar uska dil lag bhi gaya to kya lagega,
Wo thakk jayega or mere gale se aa lagega..!

Mai muskil me tumhare kaam aaun ya na aaun,
Mujhe awaz de lena tumhe achha lagega..!

Mai jis kosis se usko bhool jane me laga hun,
Jyada bhi gar lag gaya to hafta lagega..!



रुक गया है वो या चल रहा है,
हमको सब पता चल रहा है..!

उसने शादी भी की है किसी से?
और गाऊँ में क्या चल रहा है..?

Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi

Ruk gaya hai wo ya chal raha hai,
humko sab pata chal raha hai,

Usne shadi bhi ki hai kisi se?
Or gaon me kya chal raha hai..!


तेरा चुप रहना मेरे ज़हन में क्या बैठ गया,
इतनी आवाज़ दी तुझे कि गला बैठ गया..!

यूँ नहीं की फ़क़त मै ही उसे चाहता हूँ,
जो भी उस पेड़ की चावं में गया बैठ गया..!

उसकी मर्ज़ी वो जिसे पास बिठा ले अपने,
इसपे क्या लड़ना फलां मेरी जगह बैठ गया..!

इतना मीठा था वो गुस्सा भरा लहज़ा मत पूछ,
उसने जिस जिस को भी जाने को कहा वो बैठ गया..!

अपना लड़ना भी मोहोब्बत है तुम्हे इल्म नहीं,
चीखती तुम रही और मेरा गला बैठ गया..!


Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi

Tera chup rehena mere zehen me kya baith gaya,
Itni awaze di tujhe ki gala baith gaya..!

Yun nahi ki fakat mai hi use chahta hun,
Jo bhi us ped ki chaawn me gaya baith gaya..!

Uski marzi wo jise pass bitha le apne,
 Ispe kya ladna falan meri jageh baith gaya..!

Itna meetha tha wo gussa bhara leheza mat pooch,
Usne jis jis ko bhi jane ko kaha baith gaya..!

Apna ladna bhi mohobbat hai tumhe ilm nahi,
Cheekhti tum rahi or mera gala baith gaya..!


किसे खबर है की उम्र बस इस पे गौर करने में कट रही है,
की ये उदासी हमारे जिस्म से किस खुशी में लिपट रही है..!

मै उसको हर रोज़ बस यही एक झूठ सुनने को फ़ोन करता,
सुनो यहाँ कोई दिक्कत है तुम्हारी आवाज़ कट रही है..!

Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi

Kise khabar hai ki umr bas is pe gaur karne me kat rahi hai,
Ki ye udaasi hamare jism se kis khusi me lipat rahi hai..!

Mai usko har roz bas yahi ek jhooth sunne ko phone karta,
Suno yaha koi dikkat hai tumhari awaz kat rahi hai..!



बाद में मुझसे न कहना घर पलटना ठीक है,
वैसे सुनने में यही आया है रास्ता ठीक है..!

साख से पत्ता गिरे, बारिश रुके, बादल छटे,
मै ही तो सब गलत करता हूँ अच्छा ठीक है..!

इक तेरी आवाज़ सुनने के लिए ज़िंदा हैं हम,
तू ही जब खामोश हो जाये तो क्या ठीक है..!

Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi

Bad me mujhse na kehena ghar palatna theek hai,
Waise sunne me yahi aya hai rasta theek hai..!

Sakh se patta gire, barish ruke, badal chhate,
Mai hi to sab galat karta hun achha theek hai..!

Ik teri awaz sunne ke liye zinda hain hum,
Tu hi jab khamosh ho jaye to kya theek hai..!



थोड़ा लिखा और जादा छोड़ दिया,
आने वालों के लिए रास्ता छोड़ दिया..!

लड़किया इश्क़ में कितनी पागल होती है,
फ़ोन आया और चूल्हा जलता छोड़ दिया..!

तुम क्या जानो उस दरिया पर क्या गुजरी,
तुमने तो बस उससे पानी भरना छोड़ दिया..!

Thoda likha or jada chhod diya,
Ane walon ke liye rasta chhod diya..!

Ladkiya isq me kitni pagal hoti hai,
Phone aya or choolha jalta chhod diya..!

Tum kya jano us dariya par kya guzri,
Tumne to bas pani bharna chhod diya..!

तेरी कैद से मैं यूँ ही रिहा नहीं हो रहा,
मेरी ज़िन्दगी तेरा हक्क अदा नहीं हो रहा..!

मेरा मोसमो से तो फिर गिला ही फ़िज़ूल है,
तेरे छूके भी गर मै हरा नहीं हो रहा..!

तेरे जीते जागते मेरे दिल में और कोई है,
मेरी जान क्या ये बहुत बुरा नहीं हो रहा..?

ये जो डगमगाने लगी है तेरे दिए की लौ,
इसे मुझसे तो कोई मसलहा नहीं हो रहा..!

Teri kaid se mai yun hi riha nahi ho raha,
Meri zindagi tera hakk ada nahi ho raha..!

Mera moshmo se to fir gila hi fizool hai,
Tere chhooke bhi gar mai hara nahi ho raha..!

Tere jeete jagte mere dil me or koi hai,
Meri jan kya ye bahut bura nahi ho raha..!

Ye jo dagmagane lagi hai tere diye ki low,
Ise mujhse to koi maslha nahi ho raha..! 


तुम्हे हुस्न पर दस्तरस है मोहोब्बत मोहोब्बत बड़ा जानते हो,
तो फिर ये बताओ तुम उसकी आँखों के बारे में क्या जानते हो ..!

ये जियोग्राफी, फिलॉसफी, साइकोलोजी, साइंस, रियाजी वगेहरा,
जानना भी जरुरी है मगर उसके घर का पता जानते हो..?

Tumhe husn par dastras hai mohobbat mohobbat bada jante ho,
To fir ye batao tum uski akhon ke bare me kya zante ho..!

Ye Geography, philosophy, sicology, science, riyazi wagehra,
Janna bhi jaruri magar uske ghar ka pata jante ho..!


Tehzeeb Hafi Ghazal Shayari


टूट भी जाऊँ तो तेरा क्या है,
रेत से पूछ आइना क्या है,

फिर मेरे सामने उसी का ज़िक्र,
आपके साथ मसला क्या है..!

सब परिंदों से प्यार लूँगा मै,
पेड़ का रूप धर लूँगा मै,

तू निशाने में आ भी जाये अगर,
कौन सा तीर मार लूँगा मै..!


Toot bhi jaun to tera kya hai,
Ret se pooch aina kya hai,

Fir mere samne usi ka zikr,
Apke sath masla kya hai..!

Sab parindo se pyaar loonga mai,
Ped ka roop dhar lunga mai,

Tu nishane me aa bhi jaye agar,
Kaun sa teer maar loonga mai..!



क्या खबर उस रौशनी में और क्या क्या रोशन हुआ,
जब वो इन हाथों से पहली बार रोशन रोशन हुआ..!

वो मेरे सीने से लग कर जिसको रोइ वो कौन था,
किसके बुझने पर आज मै उसकी जगह रोशन हुआ..!

तेरे अपने तेरी किरणो को तरसते हैं यहाँ,
तू ये किन गलियों में किन लोगो में जा रोशन हुआ..!

अब उस ज़ालिम से इस कसरत से तौफे आ रहे हैं,
की हम घर में नई अलमारियां बनवा रहे हैं..!

हमे मिलना तो इन आवादियों से दूर मिलना,
उसे कहना गए वक्तों में हम दरिया रहे हैं..!

बिछड़ जाने का सोचा तो नहीं था हमने लेकिन,
तुझे खुश रखने की कोसिस में दुःख पंहुचा रहे हैं..!

Kya khabar us roshni me or kya kya roshan hua,
Jab wo in hathon se peheli bar roshan roshan hua..!

Wo mere sheene se lag kar jisko roi wo kon tha,
Kiske bujhne par aj mai uski jageh roshan hua..!

Tere apne teri kirno ko taraste hain yahan,
Tu ye kin galiyon me kin logo me ja roshan hua..!

Ab us zalim se is kasrat se toufe aa rahe hain,
Ki hum ghar me nai almariyan banwa rahe hain..!

Hume milna to in awadiyon se door milna,
Use kahena gaye wakton me hum dariya rahe hain..!

Bichad jane ka socha to nahi tha humne lekin,
Tujhe khus rakhne ki kosis me dukh pahucha rahe hain..!



जो तेरे साथ रहते हुए सो गवार हो,
लानत हो ऐसे सख्स पे और बेसुमार हो..!

अब इतनी देर न लगा ये न हो कहीं
तू आ चूका हो और तेरा इंतज़ार हो..!

एक आस्तीन चढाने को छोड़ कर 
हाफी तुम आदमी बहुत शानदार हो..!


Jo tere sath rehete huye so gawar ho,
Lanat ho aise saks pe or besumar ho..!

Ab itni der na laga ye na ho kahin
Tu aa chuka ho or tera intzar ho..!

Ek asteen chadhane ho chhod kar 
Hafi tum admi bahut sandar ho..!

Hindi Love Ghazal


आईने आखँ में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था,
इक याद बसर करती थी मुझे मै सांस नहीं ले पता था..!

इक शख्स के हाथ में सब कुछ मेरा, खिलना भी मुरझाना भी,
रोता था तो रात उजड़ जाती, हस्ता था तो दिन बन जाता था..!

मैं रब से राबते में रेहता, मुम्किन हो कि उससे राब्ता हो,
मुझे हाथ उठाने पड़ते थे तब जाके वो फ़ोन उठाता था..!


Aiyne aakhn me chubhte the bistar se badan katrata tha,
Ik yaad basar karti thi mujhe mai saans nahi le pata tha..!

Ik saks ke hath me sab kuchh mera, khilna bhi murjhana bhi,
Rota tha to rat ujad jati, hasta tha to din ban jata tha..!

Mai rab se rabte me reheta mumkin ho ki usse rabta ho,
Mujhe haath uthane padte the tab jake wo phone uthata tha..!
(Hindi Love Ghazal)


ये किस तरह का ताल्लुक है आपका मेरे साथ,
मुझे छोड़ जाने का मशवरा मेरे साथ..!

वो झाँकता नहीं खिड़की से तो दिन भी नि निकलता,
तुझे यकीन नहीं आ रहा तो आ मेरे साथ..!

Ye kis tareh ka talluk hai apka mere sath,
Mujhe chhod jane ka mashwara mere sath..!

Wo jhankta nahi khidki se to din bhi nahi nikalta,
Tujhe yakeen nahi aa raha to aa mere sath..!



तुझे भी साथ रखता और उसे भी अपना दीवाना बना लेता,
अगर मैं चाहता तो दिल मे कोई चोर दवाजा बना लेता..!

मै अपने खाब पूरे करके खुश हूँ पर ये पछतावा नहीं जाता,
की मुस्तक़बिल बनने से तो अच्छा था तुझे अपना बना लेता..!


Tujhe bhi sath rakhta or use bhi apna diwana bana leta,
Agar mai chahta to dil me koi chor dawaja bana leta..!

mai apne khaab poore karke khus hun par ye pachhtawa nahi jata,
Ki mustakbil banane se to achha tha tujhe apna bana leta..!
(Hindi Love Ghazal)


घर में भी दिल नहीं लग रहा, काम पर भी नहीं जा रहा,
जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा..!

रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महेबूब है,
गले भी नहीं लग रहा रो घर भी नहीं जा रहा..!


Ghar me bhi dil nahi lag raha, kaam par bhi nahi jaa raha,
Jane kya khof hai jo tujhe choom kar bhi nahi jaa raha..!

Raat ke teen bajne ko hai yaar ye kaisa meheboob hai,
Gale bhi nahi lag raha ro Ghar bhi nahi ja raha..!



मेरे बस में नहीं वरना कुदरत का लिखा हुआ काटता,
तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता..!

लहरों से ज्यादा बहाव था तेरे हर एक लफ्ज़ में,
मैं इशारे नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता..!

मैंने भी ज़िन्दगी और सबे हिज़्र काटी है सबकी तरह,
वैसे बेहतर तो ये था कम से कम मैं कुछ नया काटता..!

तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने,
क्या खुसी रह गई थी जन्मदिन की मै केक क्या काटता..!

कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने में नाराज़ हो,
जेल में तेरी तश्वीर होती तो हंस के सजा काटता..!


Mere bas me nahi warna kudrat ka likha hua kat-ta,
tere hisse me aye bure din koi dusra kat-ta..!

leheron se jada bahaw tha tere har ek lafz me,
Mai ishare nahi kaat sakta teri baat kya kat-ta..!

Maine bhi zindagi or sabe hizr kati hai sabki tareh,
Waise behetar to ye tha mai kam se kam kuchh naya kat-ta..!

Tere hote huye mombati bujhai kisi or ne,
Kya khusi reh gai thi janmdin ki mai cake kya kat-ta..!

Koi bhi to nahi jo mere bhookhe rehene me naraz ho,
Jel me teri tashweer hoti to hans ke saza kat-ta..!
(Hindi Love Ghazal)


इक और शख्स छोड़ कर चला गया तो क्या हुआ,
हमारे साथ कौन सा ये पहली मर्तबा हुआ..!

मेरे खिलाफ दुश्मनो की कतार में है वो और मैं,
बहुत बुरा लगूँगा उसपे तीर खींचता हुआ..!

Ik or shaks chhod kar chala gaya to kya hua,
Hamare sath kon sa ye peheli martaba hua..!

Mere khilaaf dushmano ki katar me hai wo or mai,
Bahut bura lagunga uspe teer kheechta hua..!



सुना है अब वो आँखे किसी और को रो रही है,
मेरे चस्मो से कोई और पानी भर रहा है..!

बहुत मजबूर होकर मै तेरी आँखों से निकला,
खुसी से कौन अपने मुल्क से बाहर रहा है..!

गले मिलना न मिला तेरी मर्ज़ी है लेकिन,
तेरे चहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है..!


Suna hai ab wo ankhe kisi or ko ro rahi hai,
Mere chasmo se koi or paani bhar raha hai..!

Bahut majboor hokar mai teri akhon se nikla,
Khusi se kaun apne mulk se bahar raha hai..!

Gale milna na mila teri marzi hai lekin,
Tere chehere se lagta hai tera dil kar raha hai..!



पहले उसकी खुश्बू मैंने खुद पर तारी की,
फिर मैंने उस फूल से मिलने की तयारी की..!

इतना दुःख था मुझे तेरे लौट के जाने का,
मैंने घर के दरवाजों से भी मूँ मारी की..!


Pehele uski khusboo maine khud par tari ki,
Fir maine us phool se milne ki taiyari ki..!

Itna dukh tha mujhe tere laut ke jane ka,
Maine ghar ke darwajon se bhi mumari ki..!



उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे,
पलट कर आए तो सबसे पहले तुझे मिलेंगे..!

अगर कभी तेरे नाम पर जंग हुई तोह,
हम ऐसे बुज़दिल की पहली लाइन पर खड़े मिलेंगे..!

तुझे ये सड़के मेरे साथ से जानती है,
तुझे ये सब इशारे खुले मिलेंगे..!

हमे ये बदन और नसीब दोनों सुधारने हैं,
हम उसके माथे का प्यार लेकर गले मिलेंगे..!

न जाने कब उसकी आंखे छलकेंगी मेरे गम में,
न जाने किस दिन मुझे ये बर्तन भरे मिलेंगे..!


Usi jageh par jahan kai raste milenge,
Palat kar aye to sabse pehele tujhe milenge..!

Aga kabhi tere name par jang hui toh,
Hum aise buzdil ki peheli line par khade milenge..!'

Tujhe ye sadke mere sath se janti hai,
Tujhe ye sab ishare khule milenge..!

Hume ye badan or naseeb dono sudharne hain,
Hum uske mathe ka pyaar lekar gale milenge..!

Na jane kab uski ankhe chhalkengi mere gam me,
Na jane kis din mujhe ye bartan bhare milenge..!

Tehzeeb Hafi


I hope you enjoyed this collection of Tehzeeb Hafi Shayari In Hindi and will share to your friends and love
Thanks


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